17 जून 2020

वामपंथ और वामपंथी क्या हैं? | Vampant aur Vampanthi kiya hai

वामपंथ और वामपंथी क्या हैं? | Vampant aur Vampanthi kiya hai

वामपंथ और वामपंथी क्या हैं? | Vampant aur Vampanthi kiya hai

  आज हम वामपंथ को समझेंगे। वामपंथ और साम्यवाद (communism) के इतिहास पर न जाकर मैं आपको इन सब का अर्थ और इनका लक्ष्य बताने को ज़्यादा ठीक समझूंगा। 

साम्यवाद या वामपंथ और वामपंथी क्या हैं? 

साम्यवाद एक तरह का सिध्दांत है या आंदोलन है, जो "अराजकता" का समर्थन करता है और राज्य या राष्ट्र की आवश्यकता और अवधारणा को अस्वीकार करता है और  समाज में धन का वितरण भी समाज के साथ में ही रहे इस विचार का समर्थन करता है अर्थात् कोई भी व्यक्ति अपनी निजी संपत्ति नहीं रख सकता बल्कि संपत्ति का वितरण समाज द्वारा ही आवाश्यकतानुसार किया जायेगा। "साम्यवाद" के सिध्दांत का समर्थन करने वाला जनसमूह "वामपंथ" (left wing), और इस सिद्धांत का समर्थन करने वाला व्यक्ति "वामपंथी" (leftist) कहलाता है।

चूंकि वामपंथी अराजकता का समर्थन करते हैं और उनका मानना है कि वर्तमान में जो तंत्र, जो व्यवस्था देश में है वह भ्रष्टाचार से लिप्त है और इसे उखाड़ कर फेंक देना चाहिए और नये सिरे से साम्यवादी सिध्दांतों के साथ नया तंत्र बनाना चाहिए, यही कारण है कि हर "वामपंथी" आपको सरकारों के विरुद्ध बोलते हुए दिखेगा क्योंकि सरकारों का चयन वर्तमान में संचालित उसी व्यवस्था के आधार पर होता है जिसे ये उखाड़ फेंक देना चाहते हैं।

एक अन्य पहलू "वामपंथ" का यह है कि यह "राष्ट्र की आवश्यकता" और "राष्ट्र की अवधारणा" (idea of nation) को नकारता है यह राष्ट्र और सीमाओं के उन्मूलन में विश्वास रखता है इसी कारण "वामपंथी" देशद्रोही दिखलाई पड़ते हैं क्योंकि जो भी चीज़ आपमें "राष्ट्रीयता की भावना" जगाती है चाहे वो "राष्ट्रगान" हो, हजारों वर्षों से चली आ रही हमारी परंपराएं हों, हज़ारों साल पुरानी हमारी समृद्ध सभ्यता हो, हमारी सनातन संस्कृति हो, वो हर चीज़ जो आपमें राष्ट्रीयता की भावना को और प्रबल करती हो और राष्ट्रीयता की भावना में बांधती हो एवं आपको राष्ट्र पर गर्व और राष्ट्र से प्रेम करने का कारण प्रदान करती हो, उस चीज़ का ये "वामपंथी" हमेशा विरोध करते हैं।

यही कारण है कि यह "राष्ट्रगान" में खड़े नहीं होना चाहते,
यही कारण है कि यह सबरीमाला और शनि शिंगणापुर वाले मुद्दों पर कोर्ट केस करते हैं, हिंदू शास्त्रों और ऋषि मुनियों का मज़ाक उड़ाते हैं।

इन "विषैले वामपंथियों" की एक और विशेषता होती है कि ये "अनीश्वरवादी" होते हैं और ईश्वर की सत्ता में विश्वास नहीं रखते, यही कारण है कि यह सब हिंदू धर्म की मान्यताओं पर हमेशा हमला करते रहते हैं क्योंकि हिंदू होने का अर्थ है कि आप अवश्य ही भारत देश पर गर्व करेंगे क्योंकि सनातन आपको अनेक कारण देता है भारत देश के वासी होने पर गर्व करने के क्योंकि सनातन से संबंधित हर एक घटना भारत में ही घटित हुई है जिसका ज्ञान आपके अपने भारतवासी होने की भावना को और बल प्रदान करता है और आप इस राष्ट्रीयता की पहचान को छोड़ने को बिल्कुल भी तैयार नहीं होते।

राम मंदिर का विरोध भी इसी कारण होता है क्योंकि जितने ज्यादा साक्ष्य आपके समक्ष अपनी संस्कृति की प्राचीनता को लेकर होंगे उतना ज़्यादा समाज की राष्ट्रीयता की भावना प्रबल होगी। यही कारण है कि इन "वामपंथियों" ने हमेशा ही हमारे "इतिहास" से छेड़छाड़ की है और उसमें मिलावट कर हमारे आदर्शों की छवि धूमिल करने का प्रयास किया है क्योंकि ऐसे इतिहास कौन गर्व करना चाहेगा जो नकारात्मकता से भरा हो??? कोई भी व्यक्ति नहीं, और जब पूर्वजों के इतिहास पर गर्व करने का कोई कारण नहीं होगा तो कौन इतिहास और परंपराओं को याद करना और उन्हें संजोकर रखना चाहेगा??? और ऐसे समाज से राष्ट्रीयता की भावना को हटाना आसान हो जाता है जिसे अपने इतिहास पर ही गर्व न हो।

आपका स्वयं को "हिंदू" कहना ही इनको कभी रास नहीं आयेगा क्योंकि आपका ऐसा कहना ही आपके गौरवशाली इतिहास गौरवगान है जो कि याद दिलाता है कि आपकी जड़ें हजारों वर्षों पुरानी हैं जो कि आपको अपनी पहचान कभी छोड़ने नहीं देगा इसलिए हिंदू धर्म को समाप्त करने के लिए "तथाकथित धर्मनिरपेक्षता" का प्रपंच रचा गया और हिंदुत्व की अवधारणा को समाप्त करने का प्रयास प्रारंभ हुआ क्योंकि यह बात ये "विषैले वामपंथी" भी जानते हैं कि "अगर हिंदू में हिंदुत्व शेष है तो इनका लक्ष्य असंभव ही रहने वाला है"।

भाईयों और बहनों इस लेख का अगला भाग भी लिखूंगा क्योंकि सभी तथ्यों का उल्लेख इस लेख में करूंगा तो लेख अधिक लंबा हो जायेगा। कृपया पोस्ट शेयर करें, और अगले पोस्ट के लिए एक बार "हां" में कॉमेंट अवश्य करें ताकि मैं समझूं कि आपका आशीर्वाद मुझे मिल रहा है 

लेख - (सत्येन्द्र पटेल) सर्वश्रेष्ठ भारत का लक्ष्य लिए एक "स्वप्नदृष्टा"

27 मई 2020

मोदी जी कड़े निर्णय कहीं भी क्यों नहीं ले पाते ?

मोदी जी कड़े निर्णय कहीं भी क्यों नहीं ले पाते


क्या आपको पता है मोदी जी कड़े निर्णय कहीं भी क्यों नहीं ले पाते हैं
ऐसे में वह जो भी कर पा रहे हैं वह भी बड़ा चमत्कार है आश्चर्यजनक है
😳
 नीचे लिखा अगर आप पढ़ेंगे तो आपको पता लग जाएगा
👇
*देश मे मुस्लिम और क्रिश्चियन का कार्ड खेलने वाली कांग्रेस ने देश मे क्या-क्या गुल खिलाये हैं...!*😡

*जानना हरेक भारतवासी का हक़ है...*

2008 मे कांग्रेस सरकार बनने के बाद सोनीया एन्टोनिया ओर राहुल खान के काले कारनामे...👇

*मुस्लिम क्रिस्चियन आरक्षण का कहर !*

राष्ट्रपति सचिवालय मे कुल पद : 49
मुस्लिम-क्रिस्चियन : 45
हिन्दू : 4

उप राष्ट्रपति सचिवालय मे कुल पद : 7
मुस्लिम-क्रिस्चियन : 7
हिन्दू : 00

मंत्रियो के कैबिनेट सचिव कुल पद : 20
मुस्लिम-क्रिस्चियन : 19
हिन्दू : 1

प्रधानमंत्री कार्यालय मे कुल पद : 35
मुस्लिम-क्रिस्चियन : 33
हिन्दू : 2

कृषि-सिचंन विभाग मे कुल पद : 274
मुस्लिम-क्रिस्चियन : 259
हिन्दू : 15

रक्षा मंत्रालय मे कुल पद : 1379
मुस्लिम-क्रिस्चियन : 1331
हिन्दू : 48

समाज-हैल्थ मंत्रालय कुल पद : 209
मुस्लिम-क्रिस्चियन : 192
हिन्दू : 17

वित्त मंत्रालय मे कुल पद : 1008
मुस्लिम-क्रिस्चियन : 952
हिन्दू : 56

ग्रह मंत्रालय मे कुल पद : 409
मुस्लिम-क्रिस्चियन : 377
हिन्दू : 32

श्रम मंत्रालय मे कुल पद : 74
मुस्लिम-क्रिस्चियन : 70
हिन्दू : 4

रसायन-पेट्रो मंत्रालय कुल पद:121
मुस्लिम-क्रिस्चियन : 112
हिन्दू : 9

राज्यपाल-उपराज्यपाल कुल पद : 27
मुस्लिम-क्रिस्चियन : 20
हिन्दू : 7

विदेश मे राजदूत : 140
मुस्लिम-क्रिस्चियन : 130
हिन्दू : 10

विश्वविद्यालय के कुलपति पद : 108
मुस्लिम-क्रिस्चियन : 88
हिन्दू : 20

प्रधान सचिव के पद : 26
मुस्लिम-क्रिस्चियन : 20
हिन्दू : 6

हाइकोर्ट के न्यायाधीश : 330
मुस्लिम-क्रिस्चियन : 326
हिन्दू : 4

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश : 23
मुस्लिम-क्रिस्चियन : 20
हिन्दू : 03

IAS अधिकारी : 3600
मुस्लिम-क्रिस्चियन : 3000
हिन्दू : 600

PTI कुल पद : 2700
मुस्लिम-क्रिस्चियन : 2400
हिन्दू : 300

1947 से अब तक किसी सरकार ने इस तरह से सविँधान को अनदेखा और इस का उल्लंघन नहीं किया,  सरकार की नजरों तो जैसे मुस्लीम से श्रेष्ठ, ईमानदार, योग्य, अनुभवी और मेहनती कोई दूसरी जातियो्ँ है ही नहीं...

*क्या ये सब कानून का उल्लंघन और सविँधान के खिलाफ नहीं था ?*

आपको यह सन्देश 3 लोगो को भेजना है।
3 × 3 = 9
9 × 3 = 27
*बस आपको तो एक कड़ी जोड़नी है,*
*देखते ही देखते पूरा देश जुड़ जायेगा...*🚩

10 अप्रैल 2020

PM-CARES की अनोखी सच्चाई

पीएम रिलीफ फंड की अनोखी सच्चाई

पूरा विश्व कोरोना वायरस के महामारी से जूझ रहा है। भारत भी इस महामारी से बचने के लिए कई उपाय किए हैं।

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से PM-CARES में दान देने की भी अपील की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब PM-CARES की बात की है तो अब इसको लेकर चर्चा यह है कि आखिर इस PM-CARES की क्या आवश्यकता है

 जबकि पहले से ही प्रधानमंत्री राहत कोष है। लोग प्रधानमंत्री राहत कोष में क्यों ना दान करें?

PM-CARES में क्यों दान करें? 

PM-CARES बारे में एक ऐसी अनोखी और खौफनाक सच्चाई पता चली है , जिसे जानकर आप भी दंग रह जाएंगे ।

समाचार वेबसाइट प्रभासाक्षी अपनी रिपोर्ट में इस बारे में विस्तार से बताया है ।

दरअसल प्रधानमंत्री राहत कोष की स्थापना जवाहरलाल नेहरू ने की थी और इसके क्लाज में एक प्रावधान डाल दिया गया था कि इसके जो कमेटी मेंबर होंगे उन सभी की सहमति और दस्तखत से ही इस फंड का उपयोग किया जा सकेगा।

साथ ही आश्चर्यजनक रूपसे नेहरू ने कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष को भी प्रधानमंत्री राहत कोष में एक कमेटी मेंबर के तौर पर डाल दिया।

प्रधानमंत्री राहत कोष के कमेटी मेंबर कौन कौन है


  1. प्रधान मंत्री
  2. भारत की राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष।
  3. उप प्रधान मंत्री।
  4. वित्त मंत्री।
  5. टाटा ट्रस्टीज़ का एक प्रतिनिधि।
  6. फिक्की द्वारा चुने जाने वाले उद्योग और वाणिज्य का प्रतिनिधि।


अब सोचिए जब यह एक सरकारी फंड है तब किसी भी राजनीतिक पार्टी का अध्यक्ष उस फंड का ट्रस्टी क्यों बनाया गया ? और आज भी बिना सोनिया गांधी के दस्तखत से या उनकी सहमति से प्रधानमंत्री राहत कोष में से मोदी पैसे खर्च नहीं कर सकते।

 ये कितनी खौफनाक सच्चाई है कि इस प्रधानमंत्री राहत कोष में केवल एक विशेष राजनीतिक पार्टी का अध्यक्ष ही मेम्बर होगा । साथ ही अप्रत्यक्ष रूप से वही इसे संचालित करेगा ।

इसीलिए मोदी ने इस फंड को कांग्रेस अध्यक्ष यानी सोनिया गांधी के चंगुल से हटाने के लिए एक नया फंड बनाया जिसका नाम रखा "पीएम केयर फंड " और इस नए फंड में जितने भी ट्रस्टी हैं वह सभी सरकारी लोग हैं।

कोई भी राजनीतिक पार्टी का अध्यक्ष या सदस्य इसमें शामिल नहीं है। पीएम केयर के जो ट्रस्टी  हैं उसमें एक प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री, रक्षा मंत्री और गृह  मंत्री है  और आने वाले वक्त में भले ही सरकार बदल जाए तो भी उस वक्त की सरकार बिना किसी राजनीतिक दखलंदाजी के इस फंड का उपयोग कर सकेगी ।

व्यक्तिगत रूप से आप भले ही कितने ही मोदी विरोधी हों लेकिन आपको मानना पड़ेगा कि जब देश हित की बात आती है तो मोदी जी पार्टी पॉलिटिक्स से ऊपर उठकर कार्य करते हैं । वरना वे चाहते तो भाजपा अध्यक्ष को इसका मेम्बर बना सकते थे लेकिन उन्होंने यह नही किया ।

मोदी जी एक ही तो दिल है , उसे कितनी बार लूटोगे । जय जय

03 अप्रैल 2020

What is Tabligi Jamaat? तबलीगी जमात क्या है? पूरी जानकारी हिन्दी में

What is Tabligi Jamaat? तबलीगी जमात क्या है? पूरी जानकारी हिन्दी में

तबलीगी जमात इसाइयों के जोशुआ प्रोजेक्ट का ही शुक्रवारी प्रतिरूप है ।

जैसे जोशुआ इतवारी द्वारा चलाया जाने वाला प्रोजेक्ट है जो मुख्यतः "वैटिकन चर्च" द्वारा संचालित और वित्त पोषित है ।

तबलीगी जमात क्या है?

शुक्रवारियों के अनुसार, “तबलीगी” का मतलब सातवें आसमानी की कही बातों का प्रचार करने वाला होता है।

तबलीगी जमात का मतलब

जमात का मतलब होता है एक खास मजहबी समूह, जो शुक्रवारियों के बारे में लोगों को जानकारी देने के लिए दुनिया भर में निकलते हैं।

मरकज क्या है?

 मरकज वो जगह है जहां यह सभी मिल कर बैठक करते हैं या एक साथ जमा होते है।

तो मरकज़ अर्थात् स्थान और तबलीगी अर्थात् शुक्रवारियों का जोशुआ संस्करण ।

यह दक्षिण दिल्ली के निज़ामुद्दीन में स्थित है और पूरी दुनिया के मजहबी यहाँ इकठ्ठा होते हैं । अधिकांश के पास लॉग टर्म वीज़ा है ( थैंक्स टू  सत्तर वर्षों का कांग्रेसी शासन) और पूरे विश्व में यह धर्मातरण का काम निज़ामुद्दीन से ही संचालित करते थे ।

और पूरे भारत के मक़बरा चाटू मूर्ख हिन्दु उसी के पास जाकर मुर्दे की मज़ार पर चादर और पैसा चढ़ाते थे । हम मूर्ख हिन्दु चमत्कार के पीछे भागने वाली सबसे धूर्त क़ौम हैं ।

पिछले सौ वर्षों से उन्हें सरकारी व्यवस्था ने संरक्षण और हम हिन्दुओं ने उन्हें धन मुहैया करवाया हुआ था और अपना ही गला कटवाने के लिए चादर चढ़ाते थे जो वास्तव में हमारी ही कफ़न बन रही थी ।

इस मरकज़ की जानकारी सरकार को थी , पर केंद्र सरकार इन धूर्तों को रंगे हाथों पकड़ना चाहती थी ।

सरकार तबलीगी जमात से क्यों नहीं लड़ सकते

सरकार इस तबलीगी जमात से तब तक नहीं लड़ सकते जब तक हम किसी भी मज़ार पर जाना बंद न करें , शुक्रवारियों और इतवारियों को पहचाने और उनको अपना धन देना बंद करें ।

ध्यान रखिएगा की पेटीकोट मीडिया अभी भी उनके साथ है ।