17 अप्रैल 2020

भर भर आंसू मुझे रुलाती। बीते दिनों की याद सताती।। कविता

भर भर आंसू मुझे रुलाती। बीते दिनों की याद सताती।। कविता

भर भर आंसू मुझे रुलाती
बीते दिनों की याद सताती

वह अपने यारों की टोली
मित्रों के संग हंसी ठिठोली
यारों के संग गप्प सड़ाका
हंसना मार के जोर ठहाका

बिन यारों के सूना लगता है
बुझा बुझा सा मन रहता है
मुक्त पंख से मन उड़ जाता
तन दीवारों से टकराता

अपनों से वो रिश्ते नाते
अपनों से वो मन की बातें
अब तो मेरा मन सुलगातीं
बीते दिनों की याद सताती

बीबी की सुन पक जाता हूं
लेटे लेटे थक जाता हूँ।।
खाते खाते भूंख सताती
पानी पीकर प्यास है आती

सोते सोते नींद का आना
बिगड़ गया सब ताना बाना
समय चक्र सा टूट गया है
दिन का चक्कर छूट गया है

खुशियों की दीवारें ढहती
तारीखें अब याद न रहती
बीती बातें अब तरसाती
बीते दिनों की याद सताती 

गलियों में पसरा सन्नाटा
चौराहे पर चलता चांटा
घर के भीतर की दीवारें
अब तो मेरा ही मन जारें।।

गरम जलेबी गरम समोसा
याद हैं आते इडली डोसा
रसगुल्ले की अलग कहानी
सोंच के मुह में आता पानी

लड्डू तेरा रुप अनोखा
यादों में है बाटी चोखा
सपने में बरफी दिख जाती
बीते दिनों की याद सताती

15 अप्रैल 2020

लॉकडाउन हास्य कविता । Lockdown funny poem

लॉकडाउन हास्य कविता । Lockdown funny poem

सभी शादी शुदा पुरुषों को समर्पित 

उठो लाल अब आंखे खोलो
बर्तन मांजो कपड़े धो लो
झाड़ू लेकर फर्श बुहारो
और किचेन में पोछा मारो 

अलसाओ न, आंखें मूंदो
सब्ज़ी काटो, आटा गू थो
तनिक काम से तुम न हारो
घी डालकर दाल बघारो

गमलों में तुम पानी डालो
छत टंकी से गाद निकालो
देखो हमसे खेल न खेलो
छोड़ मोबाइल रोटी बेलो

बिस्तर सारे , धूप में डालो
ख़ाली हो अब काम संभालो
नहीं चलेगी अब मनमानी 
याद दिला दूंगी अब नानी

ये, आईं है, अजब बीमारी
सब पतियों पे विपदा भारी
नाथ अब शरणागत ले लो
कुछ भी हो ये आफत ले लो।

13 अप्रैल 2020

कोरोना वायरस पर कविता । poem on Corona virus

कोरोना वायरस पर कविता । poem on Corona virus

कोरोना वायरस पर कविता  poem on Corona virus 

हे जिनपिंग! चीन के स्वामी।
तुम तो निकले बड़े हरामी।।
कोरोना के पालन कर्ता।
मिल जाओ तो बना दें भरता।।

कोई मुल्क नहीं है बाकी।
जहां ना मिलती इसकी झांकी।।
लॉक हुए हैं घर मे अपने।
आज़ादी के देखें सपने।।

पत्नी कोसे बच्चा रोये।
जिनपिंग नाश तुम्हारा होए।
जो वुहान से भेजा कीड़ा।
भोग रहा जग उसकी पीड़ा।।

बीमारी तुमने फैलाई।
बेच रहे हो खुद ही दवाई।
अरे मौत के सौदागर सुन।
देह में तेरी लग जाये घुन।।

काज तेरे सब विश्व अंत को।
आग लगे तेरे वामपंथ को।।
छोटी आंखों वाले चीनी।
सबकी आंख से नींदे छीनी।।

घर भीतर की यही कहानी।
रस्साकस्सी खींचातानी।।
पति पर 21 दिन हैं भारी।
पत्नी के निकली है दाढ़ी।।

काली रूप खोल के केशा।
बोल रही है शब्द विशेषा।।
वो कहती है ये सुनता है।
बाकी जग ये सर धुनता है।।

होता हर घर यही तमाशा।
खग जाने खग ही की भाषा।।
सुन कर उसको दिग्गज डोले।
पति बेचारा कुछ ना बोले।।

दुख सतावें नाना भांती।
छत पे नहीं पड़ोसन आती।।
प्रेम का तारा कब का डूबा।
दिखी नहीं कब से महबूबा।।

कोरोना के बने बराती।
बांट रहे हैं इसे जमाती।।
उधर डॉक्टर लगे हुए हैं।
24 घण्टे जगे हुए हैं।।

कुत्ते घूमें गली डगर में।
नहीं आदमी कहीं नगर में।।
देश बजाता थाली ताली।
उधर विपक्षी देते गाली।।

बन्द बज़ारें बन्द दुकानें।
सिगरेट खातिर सड़कें छानें।।
एक हो गईं दो दो पीढ़ी।
बाप से ले गए बेटे बीड़ी।।

मोदी जी कर लो तैयारी।
भीड़ बढ़ेगी एकदम भारी।।
चीन से आगे हम जाएंगे।
विश्व विजेता कहलायेंगे।।

घर की फुर्सत रंग लाएगी।
हमको वो दिन दिखलाएगी।।
कीर्तिमान हम गढ़ जाएंगे।
10 करोड़ तो बढ़ जाएंगे।।

घर में लेटे लेटे ऊबे।
सूरज कब निकले कब डूबे।।
दिनचर्या है भंग हमारी।
सुनते रहते पलँग पे गारी।।

हारेगा इक़ दिन कोरोना।
बन्द करेंगे बर्तन धोना।।
झाड़ू पोंछा करते करते।
जिंदा हैं बस मरते मरते।।

कुर्सी याद बहुत आती है।
आंखों में आंसू लाती है।।
हालातों पर करके काबू।
आफिस जाएंगे बन बाबू।।

डाउन होकर लॉक हुए हैं।
हम एकदम से शॉक हुए हैं।।
बाहर जाने से डरते हैं।
कूलर में पानी भरते हैं।।

कोरोना का चीन में डेरा।
पूरे विश्व को इसने घेरा।।
भारत मे आकर हारेगा।
संयम ही इसको मारेगा।।


29 फ़रवरी 2020

दिल्ली में हिन्दुओ के हुए नरसंहार पर एक कविता।

दिल्ली में हिन्दुओ के हुए नरसंहार पर एक कविता।
दिल्ली में हिन्दुओ के हुए नरसंहार पर एक कविता।

CAA/NRC और NPR का विरोध तो बस बहाना है,
असल मे हिन्दू ही निशाना है।

लगे थे नारे हिन्दुओ की कब्र खोदने के,
कुछ न बचा अब हिन्दू माताओं के पास सिवाय रोने के।

पेट्रोल बम तो बनाना आता है,
पर 2 लाइन का बिल न तुमसे पढ़ा जाता है।

महीनों से जाम कर रखी तुमने दिल्ली,
तुम्हे देख दुश्मन देश उड़ाते है हमारी खिल्ली।

सारी सरकारी सुविधा तो लेते तुम,
फिर भी कहते हो कि हो गए कागज़ हमारे गुम।

400 बार चाकू गोंद ले ली तुमने जान,
आखिर क्यों छीन लिए तुमने IB के अंकित शर्मा जी के प्राण।

न देखी उन्होंने जाति और पार्टी तुम्हारी,
तुम हिन्दू काफिर थे इतना ही था उनके लिए काफी।

जहा कम हो वहां सिकुलर ज्ञान हो बांटते,
जहा अधिक हो वहां हिन्दुओ को तुम काटते

अभी भी बहुत कम समय है जाग जाओ,
अब इस देश से जिहादी मार भगाओ।

इस भूल में न रहना की फिर टुकड़े होंगे देश के,
निकल पड़ेंगे हम भी सिर पर कफ़न ओढ़ के।

शेयर कर देना कविता सभी तक,
करते रहेंगे जगरुक जीवित है जबतक।

18 फ़रवरी 2020

भक्त और भाजपाई में फर्क

भक्त और भाजपाई में फर्क
भक्त और भाजपाई में फर्क

भक्त और भाजपाई में बहुत बड़ा फर्क है...
 वही जो सोनू निगम और नगर निगम में है...

#भाजपाई पार्टी लाइन की बात तब करता है जब उसे निर्देश मिलते हैं, वो लगा रहता है जुगाड़ में कौंनो पद मिल जाये.. मतलब वो सैटल होना चाहता है..

● वो मार्गदर्शक प्रेरणास्रोत, आदरणीय जैसे शब्दों का सटीक विश्लेषण कर लेता है

● वाट्स एप ग्रुप में आये निर्देश अनुसार, अपने बुद्धि विवेक अनुसार अपने नफा नुकसान को तय करके बोलता है..

● समाज हो या मीडिया इन्हें संतुलित संयमित रहने की सलाह दी जाती है.... ये पार्टी को 20% भी लाभ नही दे पाते 👍👍
ये एक फैक्ट है...

#भक्त....

असली शक्ति तो इधर है..मतलब कट्टर राष्ट्रवादी विचारधारा|

● देश हित के लिए किसी को भी पेल देते हैं.. यहां तक कि डॉनल्ड ट्रम्प को भी.. दुनिया के बड़े-बड़े नेता इनसे डरे हुए हैं 😁😁 याद है पुलवामा हमला मोदी को ही पेल दिया और एअर स्ट्राईक होने पर ही माने|

● अब तक कई सारी फिल्में ये फ्लॉप करवा चुके हैं, दीपिका की छपाक, शाहरुख की,, आमिर खान की,,, जो बकवास किया नहीं... समझो भक्तों के हत्थे चढ़ा नहीं,,,, नसीरुद्दीन शाह जैसे कलाकार आजकल इनसे बहुत डरे हुए हैं

● Maggi, Sirf एक्सेल, Zomato जैसे बड़े-बड़े ब्रांडों को ये एक बारगी मिट्टी करवा चुके हैं बॉयकॉट करके 😁

● देश के हर मुद्दे पर बहस कर लेंगे.. प्रधानमंत्री की बुराई तो सुन ही नही सकते.. 😁

● बड़े बड़े tv एंकर, पत्रकार.. सबको धूल चटा चुके हैं भक्त

● कांगिये,आपिये,वामिये चाहे ... मदरसा छाप जिहादियों को पेलने का ठेका अकेले लेते हैं.. किसी और कि भी जरूरत नहीं,,,  अकेला ही शेर 20 पे भारी

● इनको कौंनो नेता नही जानता.. पर फिर भी बड़े बड़े नेताओं को ये कुछ नहीं समझते, पार्षदों.. प्रधानों को तो अपने पास भी नहीं फटकने देते

● ये खुद भी किसी नेता के चक्कर में नहीं पड़ते, ना कोई मीटिंग.. ना कोई रणनीति.... बस तोपें चलाते हैं वो भी सीधी.. माने मोदी इज ऑलवेज राइट 👍

● शोशल मीडिया के ये बेताज बादशाह हैं
•  सबसे खास बात.. ये भाजपाई होकर भी भाजपाई को पेल देते है.. 😜

● बड़े वाले निष्पक्ष...... ये है 80% ताकत यहीं से निकलती है..  ये लोकल नेताओं को तो रत्ती भर नही समझते.. कौन है... कहां के हैं... कटहरे से.. होंगे नेता अपने घर के 😠
.
इनका निष्पक्ष लक्ष्य.... मोदी है तो मुमकिन है 🇮🇳🇮🇳
बजाते रहो😁.. 🚩🚩

मै  भाजपाई नही.. स्वघोषित अखण्ड कट्टर राष्ट्रभक्त हूँ

धर्म-शास्त्रों में स्पष्ट लिखा है.. भक्त के वश में हैं भगवान।

12 फ़रवरी 2020

मुझे शर्म है कि मै हिन्दू हूं । कविता

मुझे शर्म है कि मै हिन्दू हूं । कविता
मुझे शर्म है कि मै हिन्दू हूं । कविता

मुझे शर्म है कि मै हिन्दू हूं..😞😞
मुझे शर्म है कि मै उस हिन्दुओं के बीच में रहता हूं जो अपने बहनों को नहीं बचा सकते है..

मुझे शर्म है कि मै उस हिन्दुओं के बीच में रहता हूं जो चंद पैसों के लिए अपने देश को बेच देते है...

हा मुझे शर्म है कि मै उस हिन्दुओं के बीच में रहता हूं जो पढ़े लिखे तो है लेकिन वो किसी अनपढ से कम नहीं है...

मुझे मुझे शर्म है कि मै उस हिन्दुओं के बीच में रहता हूं जिसके रगो में मेहनत नहीं मुफ्तखोरी है...

मुझे शर्म है कि मै उस हिन्दुओं के बीच में रहता हूं जो शिर्फ़ नाम के हिन्दू है 🥺🥺

18 जनवरी 2020

harivansh rai bachchan quotes in hindi

हरिवंश राय बच्चन की पुण्य तिथि पर उन्हें शत शत नमन
दोस्तों हरिवंश राय बच्चन की पुण्य तिथि पर लाया हूँ  "harivansh rai bachchan quotes in hindi" कहने का मतलब "harivansh rai bachchan image quotes" आप इसे "harivansh rai bachchan photo" भी कह सकते है. मुझे पक्का यकीन है आपको जरूर पसंद आएगा। आपको पसंद आये तो आप "harivansh rai bachchan quotes" को Whatsapp, facebook, Twitter,  पर जरूर शेयर करे.

harivansh rai bachchan quotes

यदि न मेरे स्वप्न पाते,क्यों नहीं तुम खोज लाते
वह घड़ी चिर शान्ति दे जो पहुंचे प्रण समीप?
ओ गगन के जगमगाते दिप!
harivansh rai bachchan quotes

harivansh rai bachchan poetry

व्यथ उसे है ज्ञान सीखना, 
व्यथ उसे दशन समजना,
उसके दुःख से दुःखी नहीं हो तो बस दूर रहो!
दुखी मन से कुछ भी न कहो!
harivansh rai bachchan poetry



harivansh rai bachan ki kavita

बिता अवसर क्या आएगा, मन जीवन भर  पछताएगा,
मरना तो होगा मुझको, जब मरना था तब मर न सका!
मैं जीवन मे कुछ कर न सका।
harivansh rai bachan ki kavita

harivansh rai bachan

मिट्टी का तन,मस्ती का मन,
क्षन भर जीवन, मेरा परिचय
harivansh rai bachan

harivansh rai bachchan poem

दिन जीवन के दुलारे खो गये स्वप्न सारे,
ला सकोगें क्या उन्हें फिर खोज ह्रदय समीप?
ओ गगन के गजमगते दीप !
harivansh rai bachchan poem

10 जनवरी 2020

मेरा पहला प्यार । कविता । mera phahla pyar

मेरा पहला प्यार । कविता । mera phahla pyar

दोस्तों आज इस पोस्ट मैं लाया हूँ  mera phahla pyar कहने का मतलब mera phahla pyar  kvita आप इसे mera phahla pyar poem भी कह सकते है. मुझे पक्का यकीन है आपको जरूर पसंद आएगा। आपको पसंद आये तो आप मेरा पहला प्यार को Whatsapp, facebook, Twitter,  पर जरूर शेयर करे.

मेरा पहला प्यार दूसरी पर भारी रहा
आना-जाना तीसरे के घर भी जारी रहा

मेरा पहला प्यार दूसरी पर भारी रहा
तीसरे के घर जाना जारी रहा

चौथे प्यार ने तो हद कर दी

सोने की चैन और अगूठी हजम कर ली

पाचवें प्यार के भाई ने कुटा

छठे प्यार में मेरी ही लुगाई ने कूटा

सातवे प्यार के यारो ने कुटा 

आठवें प्यार के रिस्तेदारों ने कुटा 

नोवे प्यार में शुरू शुरू में टाटा हो गया

इसी प्यार के चक्कर में सुख के काटा हो गया

अब तो मन मे आता हैं प्यार से तौबा करलु

आपकी हँसी देखकर मन करता है एक प्यार और करलु

06 जनवरी 2020

जागो तो एक बार हिन्दू जागो तो। कविता। jago to ek bar hindu jago to

जागो तो एक बार हिन्दू जागो तो। कविता। jago to ek bar hindu jago to

जागो तो एक बार हिन्दू जागो तो
जागो तो एक बार हिन्दू जागो तो
मच गयी हा हा कार हिंदु जागो तो
जागो तो एक बार हिन्दू जागो तो
जागो तो एक बार हिन्दू जागो तो

जागी थी झांसी की रानी 
अकेली थी पर हार न मानी
जागी थी झांसी की रानी 
अकेली थी पर हार न मानी
चमक उठी तलवार हिन्दु जागो तो
चमक उठी तलवार हिन्दु जागो तो
जागो तो एक बार हिन्दू जागो तो
जागो तो एक बार हिन्दू जागो तो

हो गई जय जय कार हिंन्दू जागो तो
जागो तो एक बार हिन्दू जागो तो
जागो तो एक बार हिन्दू जागो तो

जागे थे गुरु गोविन्द प्यारे 
देश पे चारो बच्चे वारे
जागे थे गुरु गोविन्द प्यारे 
देश पे चारो बच्चे वारे
वार दिया परिवार हिन्दू जागो तो
जागो तो एक बार हिन्दू जागो तो
जागो तो एक बार हिन्दू जागो तो

जागे थे जब वीर शिवाजी 
मार भगाये मुल्ला काझी
जागे थे जब वीर शिवाजी 
मार भगाये मुल्ला काझी
जागो तो एक बार हिन्दू जागो तो
जागो तो एक बार हिन्दू जागो तो

एक बार और जागेंगे 
सबी मथुरा चल पड़ेगे
होगा मंदिर का निर्माण हिन्दू जागो तो
जागो तो एक बार हिन्दू जागो तो
जागो तो एक बार हिन्दू जागो तो

सनक उठी तलवार हिन्दू जागो तो
जागो तो एक बार हिन्दू जागो तो
जागो तो एक बार हिन्दू जागो तो

भारत माता की जय । भारत माता की जय
जय श्री राम । जय जय श्री राम  

01 जनवरी 2020

तिरंगा हमारी शान है। गणतंत्र दिवस पर कविता। Poem on republic day

तिरंगा हमारी शान है। गणतंत्र दिवस पर कविता। Poem on republic day
26 जनवरी जिसे हम गणतंत्र दिवस या Republic Day भी कहते है Republic Day हम भारतीयों के लिए बहुत बड़ा दिन है इसी 26 January 1950 के दिन भारत देश को चलाने के लिए हमारा सविंधान लागू हुआ था तभी से प्रतिवर्ष 26 January को गणतंत्र दिवस या Republic Day के राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाते है जो की हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है क्युकी अंग्रेजो की गुलामी की दासता के बाद आजादी मिलने के बाद यह दिन हम सभी के लिए बहुत ही खास महत्व रखता है

26 जनवरी गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में आप सभी के लिए यहा 26 जनवरी की कविता शेयर कर रहे है

26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर कविता आप अपने स्कूल, कॉलेज या कही गा सकते है और इसे सोशल मीडिया में भी अपने करीबियों या जानने वालो के बीच शेयर भी कर सकते है

तिरंगा हमारी शान है। गणतंत्र दिवस पर कविता। Poem on republic day


गणतंत्र हमारा अभिमान है
तिरंगा हमारी शान है

पहले अपना देश बचाया
अंग्रेजों को वापस भगाया
तब जाकर अपना संविधान बनाया
हमारा संविधान हमारी आन है
तिरंगा हमारी शान है

सीने पर गोली खाते हैं
अपनी जान गंवाते हैं
इस तरह शहीद अपना देश बचाते हैं
देश के आगे छोटी हमारी जान है
तिरंगा हमारी शान है

यहां पावन गंगा बहती है
सोने की चिड़िया रहती है
लेकिन आजादी से जीने की बात कहती है
आजादी से जीने का स्वाभिमान है
तिरंगा हमारी शान है

गणतंत्र हमारा अभिमान है
तिरंगा हमारी शान है

25 दिसंबर 2019

असफल हो गया था मैं अपने पहले प्रयास में। कविता। Motivational poem In Hindi

असफल हो गया था मैं अपने पहले प्रयास में। कविता। Motivational poem In Hindi

दोस्तों आज इस पोस्ट मैं लाया हूँ  Motivational poem In Hindi  कहने का मतलब motivational poem in hindi for students आप इसे motivational poem भी कह सकते है. मुझे पक्का यकीन है आपको जरूर पसंद आएगा। आपको पसंद आये तो आप hindi poem को Whatsapp, facebook, Twitter,  पर जरूर शेयर करे.


असफल हो गया था मैं अपने पहले प्रयास में। 
कुछ कमी आ गई थी तब मेरे आत्मविश्वास में।। 

मैं डर गया था कि अब मुझसे नहीं हो पाएगा। 
मेरी  मंजिल  मेरा  सपना  अधूरा  रह  जाएगा।।

लक्ष्य के पास होकर भी बहुत दूर खड़ा था मैं।
हार गया युद्ध जिसको जी-जान से लड़ा था मैं।।

फिर से आंखें चमक पड़ी आशा की किरण छाई।
मेरे गम को मिटाने फिर एक सुनहरी सुबह आई।।

लिया निर्णय एक बार फिर उतरूंगा मैदान में।
मंजिल पाने के लिए लगा दूंगा अपनी जान ।।

एक दिन तो ऐसा आएगा मेरी मेहनत रंग लाएगी।
चलते चलते ही सही मंजिल तो मिल जाएगी।।

कोई सपना अधूरा नहीं रहता अगर दिल में हो विश्वास।
कोई मंजिल नहीं छूटती अगर पाने का हो प्रयास।l

आज से निर्णय ले लो तुमको लड़ना है जीवन में।
तुमको बढ़ना है जीवन में कुछ करना है जीवन में।।

कांटे हो या पत्थर बिछे हो तेरी राहों में।
मंजिल की प्यास लेकर चल अपनी निगाहों में।।

हार तेरी होगी लेकिन केवल तू नहीं हारेगा।
अपने संग संग तू उन लाखों सपनों को भी मारेगा।।

जो तेरी राह में दिन रात आंखें बिछाए रहते है।
जो कहते हैं एक दिन मेरा बेटा आईएएस बनकर आएगा।

इंतजार कर रहे हैं मेरे अपने वह दिन कब आयेगा।
जिस  दिन  मेरा  बेटा  आईएएस  बनकर  आयेगा।।

मां  की  आंखों  का  तारा  पिता  का  प्यारा  बेटा।

तुझे  बनना  है  लाखों  बेसहारों  का  सहारा  बेटा ll

21 दिसंबर 2019

आजादी हमको मिली नहीं, हमने पाया बंटवारा है ! कविता

आजादी हमको मिली नहीं, हमने पाया  बंटवारा  है ! कविता
आजादी हमको मिली नहीं, हमने पाया  बंटवारा  है ! कविता

आजादी हमको मिली नहीं, हमने पाया  बंटवारा  है !
बंटवारा भी हुआ धार्मिक, अब ये जग जाने सारा है !!

तेईस प्रतिशत सनातनी, जो सिंधु के उस पार रहे,
सैतालिस से पाकिस्तानी, अब तक  उनको मार रहे !

हिंगलाज में लुटी सुतायें, मानवता शर्मिंदा है,
इन देशों में केवल कुछ, प्रतिशत हिन्दू ही जिंदा हैं !

संसद में यह बिल आया है, हम इसके आभारी हैं,
हर हिंदू की रक्षा अब, हिंदुस्तान की जिम्मेदारी है !

क्योंकि इनकी आस्थाओं के, गंगाधर हैं भारत में,
आशुतोष अवघरदानी, है शिव प्रलयंकर भारत में।

योगेश्वर की पुण्यभूमि, देवों की अगणित माला है,
मर्यादा पुरुषोत्तम का, मन्दिर भी बनने वाला है !

हिंगलाज से वैष्णव देवी तक जाने के सपने हैं,
नानक, गौतम, महावीर के बेटे भी तो अपने हैं !

इनकी पीड़ा चीख चीख कर दुनिया भर से कहती है,
ये उस देश के वासी हैं जिस देश मे गंगा बहती है !

लेकिन बहती गंगा में, कुछ हाथ भी धोने वाले हैं,
संशोधन पर छाती माथा पीट के रोने वाले हैं !

उन्हें बता दो जो अपने, हम मात्र उन्हें अपनायेंगे,
अब उनके अतिरिक्त देश में, और न पालें जायेंगे !

हम चंदन के निकट कभी, विषबेल नहीं बोने देंगे,
शरणागत के  स्वागत में, घुसपैठ  नहीं होने देंगे !

जब जी चाहे  घुस आये, दरबार  बनाकर रखा है,
भारत को अपनी खाला का, घर-बार बनाकर रखा है !

जब भारत का ही गरीब, जीवन जीता कंगाली में,
तब कैसे रोटी  दे - दें हम, रोहिंग्या की थाली में !

सब कुछ मुफ्त लुटा दें ऐसा, इक बाज़ार नहीं हैं,
हम उदार हैं लेकिन सबके,पालनहार नहीं हैं!

धनकुबेर या अन्नपूर्णा के  अवतार नहीं है हम, !
दुनिया के हर घुसपैठियों के ठेकेदार नहीं है हम !!

सत्य सनातन धर्म की जय हो !