कोरोना जिहाद से बचिये। Corona Jihad

सीएए का विरोध कर रही चंद महिलाएं आज भी भीड़ इकट्ठा कर के कोरोना जैसी महामारी को दावत दे रही हैं
ये महिलाएं सोच रही हैं कि कोरोना से अगर मर गए तो जन्नत में जाएंगे, लेकिन मरते-मरते कोरोना को बढ़ाकर इस्लामिक कोरोना जिहाद करेंगे.
मुस्लिम समुदाय के लोग शाहीनबाग के मामले पर और सामूहिक नमाज अदा करने पर जिस धूर्ततापूर्ण तरीके से अड़े हुए हैं
उससे शत प्रतिशत संभावना इस बात की है कि कोरोना वायरस मुस्लिम जनसंख्या में तेजी से फैलेगा और ऐसी स्थिति में वे अपनी विशेष फितरत के चलते अन्य बस्तियों विशेषतः हिंदूओं के सघन इलाकों में पूरे इरादे के साथ चलते फिरते “कोरोना जिहाद” के रूप में प्रवेश करने का प्रयास करेंगे।
पुराने समय से इस्लामिक आक्रांता, प्रतिपक्षी सेना व देश में ऐसी रणनीति का प्रयोग करते आये हैं।
वे अपने ही सैनिकों को ‘ब्लैक डैथ’ अर्थात प्लेग ग्रसित कर प्रतिपक्षी सेना में छोड़ देते थे।
वह आत्मघाती तो मर जाता था लेकिन प्रतिपक्षी सेना में प्लेग फैल जाता था और वे बिना लड़े जीत जाते थे।
ये उन लोगों में से हैं कि अगर एक आंख फूटने से पड़ोसी की दोंनों आंखें फूटती हैं तो ये अपनी एक आँख फोड़ लेंगे।
मुस्लिम समुदाय के लोग इसे ‘कोरोना जेहाद‘ के रूप में प्रयोग करने का पूरा इरादा प्रदर्शित कर रहे हैं।
अतः पूर्व सावधानी बरतते हुये यूँ तो सभी से एक मीटर दूर से बात करें लेकिन शाहीन बाग या नमाज से लौटे मुस्लिम से दस मीटर दूर से बात करें बल्कि बेहतर है कि उसका पूर्ण बहिष्कार करें।
आखिर आपकी और आपके बच्चों की जान का सवाल है। इनकी दुकानों और इनके किसी भी संपर्क से बचिये।
इन कोरोना जिहादी से बचिये।
लेखक:- अरविंद सिंघी



