poemकविता

दिल्ली में हिन्दुओ के हुए नरसंहार पर एक कविता।

(Last Updated On: April 29, 2023)

CAA/NRC और NPR का विरोध तो बस बहाना है,
असल मे हिन्दू ही निशाना है।


लगे थे नारे हिन्दुओ की कब्र खोदने के,
कुछ न बचा अब हिन्दू माताओं के पास सिवाय रोने के।


पेट्रोल बम तो बनाना आता है,
पर 2 लाइन का बिल न तुमसे पढ़ा जाता है।


महीनों से जाम कर रखी तुमने दिल्ली,
तुम्हे देख दुश्मन देश उड़ाते है हमारी खिल्ली।


सारी सरकारी सुविधा तो लेते तुम,
फिर भी कहते हो कि हो गए कागज़ हमारे गुम।


400 बार चाकू गोंद ले ली तुमने जान,
आखिर क्यों छीन लिए तुमने IB के अंकित शर्मा जी के प्राण।


न देखी उन्होंने जाति और पार्टी तुम्हारी,
तुम हिन्दू काफिर थे इतना ही था उनके लिए काफी।


जहा कम हो वहां सिकुलर ज्ञान हो बांटते,
जहा अधिक हो वहां हिन्दुओ को तुम काटते


अभी भी बहुत कम समय है जाग जाओ,
अब इस देश से जिहादी मार भगाओ।


इस भूल में न रहना की फिर टुकड़े होंगे देश के,
निकल पड़ेंगे हम भी सिर पर कफ़न ओढ़ के।


शेयर कर देना कविता सभी तक,
करते रहेंगे जगरुक जीवित है जबतक।

Martin Dumav

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